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Meri bhavnavon ko mile pankh

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मेरी मां

Posted On: 5 Sep, 2014 Others,कविता में

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मं का वो भोला मासूम चेहरा याद आता है।
उसका थपकी दे कर सुलाना याद आता है।
उसकी मीठी झिड़की देकर जगाना याद आता है।
खाना न खाने पर मुझे खिलाये चवन्नी का वो नमकपारा,
रोउं मैं तो मेरे आंसू पीले वो सारा।
बीमार पड़ी मां का वो मुरझाया चेहरा,
कांपता हुया थका शरीर याद आता है।
कमरे में दर्द से कराहना,
गिर-गिर चूल्हे के काम निपटाना
याद आता है।

दादी की डांट, बुआ के तानों से सहमना
चुपचाप उसका आंसू बह जाना
याद आता है।
इसके बावजूद सबकी भलाई,
कभी भी न की किसी की बुराई,
याद आता है,
उसके साथ का हर लम्हा, हर बात
हमेशा और हर पाल याद आता है।

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6 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

amitmit1983 के द्वारा
September 7, 2014

बहुत बढ़िया

    Noopur के द्वारा
    September 10, 2014

    बहुत बहुत धन्यवाद

deepak pande के द्वारा
September 7, 2014

sunder bhavpurn rachna nupur jee sadar badhai

    Noopur के द्वारा
    September 27, 2014

    dhanyavad deepak ji

Ravinder kumar के द्वारा
September 6, 2014

नूपुर जी, नमस्कार. माँ चाहे पास हो या दूर, हमारे तन-मन से जुड़ी रहती है. सुन्दर भावों के लिए आपको बधाई.

    Noopur के द्वारा
    September 27, 2014

    bahut bahut sukriya


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